70+ Impotant Share Market Terminology in Hindi

निबेश के क्षेत्र में मुश्किल चीज़ो में से एक है Share Market Terminology in Hindi  या शेयर मार्केट शब्दाबली को समझना।

तो  अगर आप इस क्षेत्र में बिलकुल नए है ! तो मुझे यकीन है की आपको बित्तीय शब्दो को समझने में परेशानी होती होगी। लेकिन घबराइए मत आज इस लेख के द्वारा आपकी इन परशानियों का समाधान जरूर होगा तो आइये जानते है निबेश में और शेयर मार्केट में प्रयोग होने वाले प्रचलित शब्दाबली( Share Market Terminology) के बारे में।

Table of Contents

70 +Share Market Terminology in HIndi

इस लेख में आज जो भी शब्दाबलिओ के बारे में बताया जायेगा उनमे से कुछ के बारे में सायद आपको पता भी हो और कुछ चीज़े ऐसी भी होगी जिनके बारे में आपको पता ना हो। इसलिए इस आर्टिकल को ध्यान पुर्बक जरूर पढ़े, तो चलिए आगे बरते है।

1.निवेश (Investment):

इसका मतलब होता है , लाभ की आशा करके किसी संपत्ति(Asset ) में पैसे लगाना जिसे निबेश या Investment भी कहते है।

2.व्यापारिक सूची (Portfolio):

Portfolio Meaning in Hindi

पोर्टफोलियो का मतलब होता है एक ब्यक्ति या संगठन के अलग अलग निबेश का संग्रहण। ये स्टॉक्स, बांड्स ,म्यूच्यूअल फंड्स और दूसरे एसेट के प्रकार का संग्रहण होता है जो निबेशको द्वारा चुने जाते है।

म शब्दों में कहे तो -पोर्टफोलियो एक बैग की तरह काम करती है जिसमे आपका सारी सम्पतियो के जानकारी को इकठ्ठा रखा जाता है।

3.शेयर (Share):

शेयर का मतलब होता है हिस्सा ,और ये सब्द का प्रयोग ज्यादातर शेयर मार्केट में होती है। जिसमे एक शेयर यानि किसी कंपनी का एक हिस्सा , और हिस्से का एक कीमत होता हि , जैसे की TATA Motors का एक शेयर की कीमत 792 rs है जो समय के साथ साथ बरती जाएगी।

4.शेयर बाजार (Stock Market):

SHARE MARKET KYA HAI

Share Market एक ऐसा Market है जहा बोहत सारे कंपनियों के शेयर्स की बिक्री और खरीदी होती है। जैसे normal सब्जी बाजार में सब्जी ख़रीदा और बेचा जाता है ठीक उसी तरह।

भारत में केबल ऐसे 2 Share Market है BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) और NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) जहा लगभग 5000 से ज्यादा कम्पनिया listed है। लेकिन आप सीधा NSE या BSE में जाके शेयर खरीद या बेच नहीं सकते।

5. बुल मार्केट (Bull Market):

ये मार्किट में होने वाली हलचल है बुल मार्केट यानि मार्किट की कीमत ऊपर की तरफ जा रही है। और मार्किट में दर्ज ज्यादातर कंपनियों की कीमत बढ़ रही है। इसे बुल इसलिए कहा जाता है किउकी , भेषा यानि बुल की हमला करने की तरीके से इसका नाम बुल मार्केट रखा गया है यानि भेषा निचे ऊपर की तरफ अपना सींग मारती है।

6.बेयर मार्केट (Bear Market):

ये भी मार्किट में होने वाली हलचल है बेयर मार्केट यानि मार्किट की कीमत निचे की तरफ जा रही है। और इससे मार्किट में दर्ज ज्यादातर कंपनियों की कीमत कम हो रही है। इसे बेयर इसलिए कहा जाता है किउकी , भालू यानि बेयर की हमला करने की तरीके से इसका नाम बेयर मार्केट रखा गया है यानि भालू ऊपर से निचे की तरफ अपना पंजा मारती है।

7.स्टॉक एक्सचेंज (Stock Exchange):

यह वो संस्था है जहा सारे लिस्टेड कंपनियों के शेयर का ट्रेड या लेन देन होता है। इसे ही शेयर बाज़ार कहते है ,भारत में ऐसे 2 संस्था है जिनमे से एक है NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ) और BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ) .

8.निवेशक (Investor):

ये वो ब्यक्ति या संस्था है जो लाभ के उद्देश्य से किसी बिज़नेस में पैसे लगाते है लम्बे समय के लिए। जिसे एक शब्द में निबेश करना या Invest करना कहते है।

9.ट्रेडर (Trader):

Trader वे व्यक्ति होते हैं जो अपने लिए या बैंक, ब्रोकरेज फर्म या हेज फंड जैसी किसी संस्था के लिए वित्तीय संपत्ति की अल्पकालिक खरीद और बिक्री में संलग्न होते हैं, जिनके द्वारा ये अधिक से अधिक मुनाफे बनाते है।

10.ब्रोकर (Broker):

Broker वे व्यक्ति या संस्था बिशेष होते हैं जो एक खरीददार (Buyers) और बिक्रेता (Sellers) के बिच लेनदेन कराती है। किउकी स्टॉक मार्केट में जाके सीधे शेयर नहीं ख़रीदा जा सकता है , इसलिए जो स्टॉक एक्सचेंज के सदस्य है उनके द्वारा शेयर ख़रीदा या बेचा जाता है जिसे एक शब्द में Broker भी कहते है।

11.इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday Trading):

डे ट्रेडिंग मूल रूप से तब होती है जब ट्रेडर एक ही दिन में स्टॉक खरीदते और बेचते हैं। वे खरीदने या बेचने के बारे में त्वरित निर्णय लेते हैं और दिन खत्म होने से पहले अपनी खरीदारी बेच देते हैं। ये जोखिम भरा ट्रेडिंग है लेकिन निरंतर प्रयास इसमें सफलता हासिल किया जा सकता है।

12.डेमेट एकाउंट (Demat Account):

demat account kya hai

ये वो अकाउंट होता है जहा आप अपने शेयर जमा कर सकते हैं और जहां शेयर इलेक्ट्रॉनिक रूप से संग्रहीत होते हैं,और जिसके मदद आप ट्रेडिंग भी कर सकते है उस अकाउंट को डीमैट अकाउंट कहा जाता है।

13.मार्जिन ट्रेडिंग (Margin Trading):

मार्जिन ट्रेडिंग एक स्टॉक मार्केट फीचर है, जो इन्वेस्टर्स को अधिक स्टॉक खरीदने की अनुमति देता है. निवेशक मार्केट की कीमत के बजाय मार्जिनल कीमत पर स्टॉक खरीदकर उच्च रिटर्न अर्जित कर सकते हैं. यहां स्टॉकब्रोकर स्टॉक खरीदने के लिए पैसे उधार देगा और लोन की तरह वे ब्याज़ वसूल करेंगे।

14.लॉन्ग पोजीशन (Long Position):

किसी शेयर या संपत्ति की कीमत बढ़ने पर पैसे लगाने को लॉन्ग पोजीशन कहते है। जिससे उस संपत्ति की कीमत बढ़ने पर निबेशक़ पैसे कमाता है।

15.शॉर्ट पोजीशन (Short Position):

फाइनेंस में, किसी एसेट में शॉर्ट होने का मतलब है कि उसमें इस तरह से निवेश करना कि जब उस एसेट की कीमत गिरे तो निवेशक को फायदा हो।

16.ब्लू चिप स्टॉक्स (Blue Chip Stocks):

ये उन कंपनियों के स्टॉक्स होते है जो या तो अपने सेक्टर में लीडर होते है या बोहत फाइनेंसियली अच्छे प्रदर्शन कर रहे हो। इन कंपनियों शेयर की कीमत ज्यादा होती और जोखिम भी कम होती , ये कम्पनिया लगातार अपने शरधारको को DIvidend प्रदान करती है।

17.स्मॉलकैप स्टॉक्स (Small Cap Stocks):

ये वो कम्पनिया होती जो मार्केट में या तो नयी होती है या लॉस कर रही होती है। इन कंपनियों में पैसा लगाने में जोखिम भी ज्यादा होती और फायदे भी ज्यादा होते है। स्मॉल कैप स्टॉक वे स्टॉक हैं जिनका मार्केट वैल्यू 5,000 करोड़ रुपये से कम होती है।

18.मिडकैप स्टॉक्स (Mid Cap Stocks):

‘मिड-कैप’ शब्द से उन कंपनियों और स्टॉक को निर्दिष्ट किया जाता है जो लार्ज-कैप और स्मॉल-कैप कैटेगरी के बीच में होते हैं. मिड-कैप्स ₹5,000 से अधिक लेकिन ₹20,000 करोड़ से कम की मार्केट वैल्यू वाली कंपनियां होती है। इनमे जोखिम कम होता है।

19.पी-ई रेशियो (P/E Ratio):

PE Ratio in Hindi

यह वह आर्थिक माप है जिसका उपयोग होता है ताकि हम जान सकें कि किसी विशेष कंपनी की शेयर का कीमत कितनी कम है या कितनी ज्यादा है।पीई रेश्यो(Price Earning Ratio) के मदद से हम ये पता लगा सकते है , किसी शेयर की कीमत सही है या नहीं

20.बेटा (Beta):

ये एक फाइनेंसियल इंडिकेटर है जिसके मदद से निबेशक़ या ट्रेडर ,किसी शेयर से जुड़ी जोखिमों का पता लगा सकता है। यह निवेशकों के लिए स्टॉक की अस्थिरता (Volatility) को मापने के लिए उपयोग किया जाता है।

21.डिविडेंड (Dividend):

Dividend का हिंदी में मतलब होता है लाभांश। ये शब्द को अगर देखे तो इसमें ” लाभ ” और “अंश ” है ,यानि प्रॉफिट का हिस्सा। लाभ के इस हिस्से को कंपनी अपने Shareholders में बाँट देती है।

शेयर मार्केट में 2 प्रकार की कम्पनिया है जो डिविडेंड देती है। एक है Large Cap कंपनी और दूसरी है वो जिनको अपना डिविडेंड रिकॉर्ड अच्छा रखना है। ऐसे बोहत सारे कम्पनिया है जो लॉस कर रही है और साथ ही अपने Shareholders को डिविडेंड भी दे रही है।

22.रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI – Return on Investment):

इसका मतलब है की किसी सम्प्पति अपने जितना पैसा निबेश किया है, उस निबेश से जो भी लाभ होगा उसे ही Return on Investment कहा जाता है।

23.स्टॉप लॉस (Stop Loss):

यह एक ऑर्डर है जिसे आप अपने ब्रोकर के जरिये भेज कर उन्हें किसी विशेष ट्रेड पर नुकसान को सीमित करने का निर्देश देते है। ये ट्रेडिंग में उपयोग किया जाता है।

24.टेक्निकल एनालिसिस (Technical Analysis):

Technical Analysis एक पद्धति है जिसका उपयोग ट्राडेरो और निवेशकों द्वारा वित्तीय बाजारों में भविष्य के कीमतों का मूल्यांकन और भविष्यवाणी करने के लिए किया जाता है। Technical Analysis ऐतिहासिक मूल्य और volume डेटा पर निर्भर करता है। पैटर्न, Trends और Indicators का विश्लेषण करके,ट्रेडर का लक्ष्य के लिए संभावित Buying और Selling पॉइंट की पहचान करना है।

25.फंडामेंटल एनालिसिस (Fundamental Analysis):

फंडामेंटल एनालिसिस एक निवेश तकनीक है जिसमें निवेशकों द्वारा एक कंपनी या सुरक्षा के फाइनेंसियल स्थिति को विश्लेषित किया जाता है। इसमें कंपनी के फाइनेंसियल डेटा, प्रोडक्शन, और Marketing की प्रक्रिया का अध्ययन किया जाता है ताकि निवेशक यह निर्णय ले सकें कि क्या यह कंपनी या सिक्योरिटीज उनके निवेश के लिए सही है या नहीं।

26.चार्ट (Chart):

शेयर मार्केट में चार्ट बाजार के ट्रेंड की स्थिति को पहचानने और कीमत को देखने का ग्राफ होता है। चार्ट पढ़ने से किस कंपनी के ओपन, क्लोज, हाई, लो प्राइस की जानकारी मिलती है। आप ऑप्शन और इंट्राडे ट्रेडिंग में चार्ट एनालिसिस के द्वारा सही समय पर ट्रेड (खरीद और बिक्री) कर सकते हैं।

27.बुलेट ट्रेडिंग (Bullet Trading):

बुलेट ट्रेड एक Short Selling तकनीक है जिसका उपयोग तब किया जाता है जब बाजार मंदी की स्थिति में होता है, नीचे की ओर बढ़ रहा होता है। बुलेट ट्रेड में, निवेशक “इन-द-मनी” कहे जाने वाले पुट ऑप्शन को खरीदकर एक Short पोजीशन लेते हैं क्योंकि Option का स्ट्राइक मूल्य Underlying Asset के मूल्य से अधिक होता है।

28.गैप अपनिंग (Gap Opening):

ये मार्केट की किसी शेयर की कीमत चार्ट में होने वाली एक परिस्थिति है। पिछले दिन के तुलना में या तो बोहत ऊपर से या तो बोहत निचे से मार्किट खुलती है, जिसमे दो तरह की स्थिति होती है एक है गैप उप ओपनिंग और दूसरी है गैप डाउन।

29.मार्जिन कॉल (Margin Call):

मार्जिन आपके ब्रोकर के द्वारा दी गयी एक सेवा है जिसके मदद से आप ब्रोकर के पैसे ही शेयर ले सकते है। और मार्जिन कॉल आपके ब्रोकर की मांग है जिसमे आपको अपने खाते की इक्विटी राशि बढ़ाने की आवश्यकता है।

30.रिस्क रिवॉर्ड रेशियो (Risk-Reward Ratio):

ये एक माप है जो शेयर मार्किट ट्रेडिंग मे इस्तेमाल होती है जिससे हम अपने क्षमता के अनुशार जोखिम ले सके और उस हिसाब से हमारा रिवॉर्ड भी हम माप सकते है। जिसे एक सब्द में Risk एंड Reward Ratio कहते है।

31.इक्विटी (Equity):

Equity Meaning in Hindi

सबसे पहली बात यह है कि यह एक तरह का हिस्सेदारी होता है, जिसे आप शेयर बाजार में खरीद सकते हैं। जब आप एक कंपनी के इक्विटी शेयर को खरीदते हैं, तो आप उस कंपनी के साथ मालिकाना संबंध बना लेते हैं।

32.डिबेंचर (Debenture):

इसका मतलब होता है ऋणपत्र जिसके मदद से किसी बिशिष्ट कंपनी लोन लेती है और बदले में डिबेंचर सर्टिफिकेट प्रदान करती है। जरुरत पड़ने पर डिबेंचर सर्टिफिकेट द्वारा उस कंपनी की शेयर्स मार्केट में जारी की जा सकती है।

33.स्विंग ट्रेडिंग (Swing Trading):

Swing Trading in Hindi

शेयर मार्केट में शेयर के कीमत में जो उतार चढ़ाव होता है उसी उतार चढ़ाव को मद्दे नजर रखते हुए ट्रेडर्स अपने पैसे को 1 से ज्यादा दिनों या हफ्तों के लिए ट्रेड लेते है। या तो उसमे बेच के पैसे कमाते है या तो खरीदके। उसी उतार चढ़ाव के जरिये पैसे कमाने को आसान शब्दो में Swing Trading बोला जाता है।

34.सेंसेक्स (Sensex):

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज सेंसेक्स(Sensex), भारतीय स्टॉक मार्केट का एक अन्य मुख्य स्टॉक इंडेक्स। जिसमे 30 सबसे बढ़ी कंपनियों बर्गीकृत है।

35.निफ्टी (Nifty):

भारत में मौजूद 50 सबसे बढ़ी कंपनिया है जो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में बर्गीकृत है जिन्हे एक साथमे निफ़्टी 50 कहा जाता है। इन 50 कंपनियों में आप एक साथ निबेश कर सकते है निफ़्टी में निबेश के द्वारा।

36.ड्रेजिंग लाइन्स (Drawing Lines):

इसके नाम से आप समझ गए होंगे इसका मतलब शेयर की चार्ट लाइन बनाना। जिसके मदद से आप सप्लाई और डिमांड पता कर सकते है।

37.चार्ट पैटर्न्स (Chart Patterns):

Chart pattern ,Technical Analysis का वो हिस्सा होता है ,जो फाइनेंसियल मार्केट में कीमत(Price) के द्वारा बनते है। यह कई दिनों की कैंडल के मूवमेंट से मिलकर बनता है जिसके बनने से हम यह अंदाजा लगा सकते है की शेयर का कीमत ऊपर जायेगा या निचे।

38.स्टॉप लॉस ऑर्डर (Stop Loss Order):

यह एक ऑर्डर है जिसे आप अपने ब्रोकर के जरिये भेज कर उन्हें किसी विशेष ट्रेड पर नुकसान को सीमित करने का निर्देश देते है। स्टॉप लोस् आर्डर के जरिये ही आप बढ़े से बढ़ा लॉस लेने से बच सकते है।

39.लिमिट ऑर्डर (Limit Order):

यह शेयर मार्किट ट्रेडिंग में एक आर्डर होता है, ये ऑर्डर का इस्तेमाल आपके खरीदने या बेचने के ऑर्डर की सीमा निर्धारित करने के लिए किया जाता है।

40.फ्यूचर्स और ऑप्शन्स (Futures and Options):

  Futures:

ये एक वित्तीय साधन है जिसका उपयोग अलग अलग सम्पत्तिओं को खरीदने और बेचने के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य भविष्य की कीमत की भविष्यवाणी करना और इसे पहले से निर्धारित कीमत पर खरीदने या बेचने की अनुमति देना है।

  Options:

ऑप्शन ट्रेडिंग एक विशेष प्रकार का वित्तीय ट्रेडिंग है जिसमें खरीदारी और बेचने के लिए ऑप्शन(अनुमति पत्रों ) का उपयोग किया जाता है।इसमें भी भारी मुनाफा कमाने की सम्भावना ज्यादा होती है।

41.सपोर्ट और रेजिस्टेंस (Support and Resistance):

Support and Resistance in Hindi

   Support:

ट्रेडिंग में Support वो बिंदु होता है जिससे टकराकर शेयर की कीमत ऊपर उठती है। किउकी Support पॉइंट पर बोहत सारे खरीददार (Buyers ) होते है जो शेयर की कीमत को निचे गिरने नहीं देते। जिससे मार्किट में तेज़ी आने की सम्भाबना बढ़ जाती है।

   Resistance:

Resistance Point चार्ट में वो बिंदु होता है , जिस बिंदु पर बोहत सारे बिक्रेता ( Sellers) रहते है , जो शेयर की प्राइस को ऊपर जाने से पहले “Sell” करके उसे रोकते है। जिससे मार्केट अपना Trend बदल लेती है।

42.इंडेक्स फंड (Index Fund):

ये एक निबेश बिकल्प होता है जो म्यूच्यूअल फण्ड की तरह होता है जिसमे निफ़्टी 50 की तरह ही बोहत सारे इंडेक्स होते है। सबसे अच्छी बात ये है की इसमें रेगुलर रिसर्च की जरुरत नहीं होती।

43.एक्टिव फंड (Active Fund):

एक्टिव फण्ड एक निबेश बिकल्प होता है जिसमे जो भी फण्ड मैनेजर होता है उसे रेगुलर रिसर्च करना परता है ज्यादा से ज्यादा लाभ कमाने के लिए।

44.बुलिश (Bullish):

ये एक मार्किट की स्थिति है , जब मार्किट में लिस्टेड कंपनियों को शेयर की कीमत बरती है तो उसे ही बुलिश कहा जाता है।

45.बियरिश (Bearish):

ये एक मार्किट की स्थिति है , जब मार्किट में लिस्टेड कंपनियों को शेयर की कीमत घट रही होती है या मार्किट मंदी में जा रहा होता है तो उसे ही बेयरिश कहा जाता है।

46.एक्सपायरी (Expiry):

ये एक ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट की अंतिम तिथि को दर्शाता है, जिस पर ऑप्शन होल्डर्स नियमो और शर्तो के अनुसार अपने अधिकार का उपयोग कर सकते हैं। भारत में हर महीने के आखरी गुरुबार को होती है। इस दिन सारे ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट ख़तम हो जाते है।

47.आईपीओ (IPO – Initial Public Offering):

जब कोई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को पैसे की जरुरत होती है तब वो अपने शेयर्स को पब्लिकली जारी करती है। उसे ही IPO या इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग कहा जाता है। उसके बाद कंपनी प्राइवेट लिमिटेड से पब्लिक लिमिटेड कंपनी बन् जाती है।

48.रिटेल इन्वेस्टर (Retail Investor):

ये वो निबेशक़ होते है जो शेयर मार्किट में गिनती में सबसे ज्यादा होते है। ये छोटे और आम निबेशक़ होते है मेरे और आपके तरह। इनके पास जयदा पूंजी नहीं होती है।

49.वॉल्यूम (Volume):

किसी निर्दिष्ट कंपनी की शेयर में कितनी ज्यादा खरीद और और बिक्री हो रही है उसे वॉल्यूम कहते है।

50.मुद्रा बाजार (Currency Market):

फाइनेंसियल मार्किट में एक बिकल्प ऐसा भी है जहा बिदेशी मुद्राओ का भी लेन देन होता है , जैसे शेयर ट्रेडिंग होता है बिलकुल उसी तरह। इसे ही करेंसी मार्केट कहा जाता है।

51.लीवरेज (Leverage):

निबेश करने के उद्देस्य से लिया गया उधार या लोन ही लिवरेज कहलाता है। जिसके मदद से आपके ट्रेड पर रिटर्न बढ़ाने का मौका मिलता है।

52.इंट्रिंसिक वैल्यू (Intrinsic Value):

Intrinsic Value या आतंरिक मूल्य किसी कंपनी की शेयर की जो असली कीमत होती है उसे कहते है। उदाहरण से समझते है , जैसे बाजार में कोई दुकान दार हर सामान की कीमत उसके बास्तबिक कीमत से ज्यादा आपको बताता है और आप मोल भाव करते है दुकान दार से। तो वो जो बास्तबिक कीमत होता है उसे ही इन्ट्रिंसिक वैल्यू कहा जाता है।

53.रिसर्च रिपोर्ट (Research Report):

रिसर्च रिपोर्ट पेशेवर इक्विटी विश्लेषकों द्वारा बनाई गयी दस्तावेज हैं जो निवेशकों को और ट्रेडर्स को एक विशेष डेरिवेटिव्स के लिए खरीदने, बेचने जैसी प्रक्रियाओ को करने की सही सलाह देती है।

54.मार्केट वॉचलिस्ट (Market Watchlist):

यह मार्केट में उपलब्ध शेयर्स का एक लिस्ट होता है जिसमे कोनसी कंपनी कैसा प्रदर्शन कर रही है ये देखा जाता है ,इसे आप अपने हिसाब से सेट कर सकते है।

55.फंड मैनेजर (Fund Manager):

एक हेज फण्ड में जो भी ब्यक्ति आपके दिए हुए सारे पैसे संभालता है और उसे सही जगह पे निबेश करता है उसे ही फण्ड मैनेजर बोला जाता है। और उसे इस काम के लिए पैसे मिलते है कमीशन के रूप में।

56.ब्रॉकरेज चार्ज (Brokerage Charge):

ये आपके ब्रोकर को देने वाला फीस होता है। जब आप ट्रेडिंग करते है तो ब्रोकर को एक फीस देते है उसी ही ब्रोकरेज कहते है।

57.लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट (Long Term Investment):

1 साल से ज्यादा समय के लिए किसी बिशेष कंपनी के शेयर में निबेश करने को लॉन्ग टर्म इन्वेटिंग कहा जाता है।

58.शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग (Short Term Trading):

कम समय के लिए शेयर बाजार में शेयर लेन देन करने को शार्ट टर्म ट्रेडिंग कहा जाता है।

59.डेरिवेटिव्स (Derivatives):

Derivatives एक प्रकार के फाइनेंसियल कॉन्ट्रैक्ट्स होते है जो मूल रूप से किसी अन्य एसेट या सामान की कीमत को दर्शाता है। ये कॉन्ट्रैक्ट्स तय करते है की भविष्य में किसी निर्दिष्ट समय पर एक बिशेष एसेट जैसे की स्टॉक्स ,कर्रेंसी ,कमोडिटीज या बांड्स की कीमत किस तरह से बदलेगी।

60.शेयरहोल्डर (Shareholder):

अगर आप किसी कंपनी में निबेश करते है तो उसके बदले में आपको उस बिशेष कंपनी की शेयर्स आपको मिलेंगे तो आप उस कंपनी के शेयर होल्डर बन जायेंगे। यानि उस कंपनी की मालिकाना का अधिकार आपको भी मिलेगा।

61.हेज फण्ड (Hedge Fund):

हेज फण्ड एक संस्था होती है जिसमे आप अपने पैसे देके निबेश कर सकते। और इसमें जोखिम भी कम होता है जहा एक फण्ड मैनेजर आपके पैसे को सही तरीके से निबेश और प्रबंधित करता है।

62.इंटरेस्ट रेट (Interest Rate):

इसका मतलब होता है ब्याज दर यानि अगर आप किसी ब्यक्ति या संस्था से उधार लिए है तो उस उधारी को चुकाने की जो कीमत होती है उसे ही ब्याज दर कहते है।

63.इंफ्लेशन रेट (Inflation Rate):

इन्फ्लेशन का मतलब होता है महंगाई और ये महंगाई की बढ़ने के दर को इन्फ्लेशन रेट कहा जाता है। हमारे भारत की हर साल की महंगाई दर है 5-6 %

64.दिविधेंड इंकम (Dividend Income):

कंपनी अपने लाभ के हिस्से से जो पैसा अपने निबेशको को प्रदान करती है ,वो निबेशको के लिए डिविडेंड इनकम कहलाता है।

65.एग्जिट स्ट्रैटेजी (Exit Strategy):

अगर आप किसी शेयर में निबेश करते है और उस शेयर को बेचने के लिए एक रणनीति बनाते है उसी रणनीति को एग्जिट स्ट्रेटेजी बोला जाता है। खासकरके ये ट्रेडिंग करने में उपयोग होता है।

66.स्टॉक स्प्लिट (Stock Split):

जब कोई कंपनी अपनी लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए मार्किट में उपलब्ध उसके स्टॉक के शेयर्स को बिभाजित करती है उसे ही स्टॉक स्प्लिट कहा जाता है। यानि मान लीजिये आपके पास XYZ कंपनी की 10 शेयर है , अब वो कंपनी अगर 1 :10 के हिसाब से स्टॉक स्प्लिट करती है तो आपके पास उस कंपनी के 100 शेयर हो जायेंगे अपने आप ही , और उस शेयर की कीमत भी 10 गुना कम हो जाएगी।

67.बायबैक (Buyback):

जब एक कंपनी अपने ही शेयर्स को खरीदना सुरु करती है ताकि मार्किट में उस कंपनी की शेयर्स की मात्रा को घटाने के लिए उसे ही बायबैक कहते है।

68.स्टॉप आर्डर (Stop Order):

ये एक बिशेष प्रकार का आर्डर है जो ट्रेडिंग करते समय उपयोग होता है , जिससे आप अपने लोस् को लिमिट कर सकते है।

69.टेक्निकल इंडिकेटर्स (Technical Indicators):

ट्रेडिंग करते समय जो भी टेक्निकल टूल का इस्तेमाल किया जाता है उसे ही इंडिकेटर कहते है। जिसका उपयोग शेयर के कीमत ऊपर या निचे जाएगी ये पता लगाने के लिए किया जाता है।

70.इक्विटी रिसर्च (Equity Research):

इक्विटी रिसर्च एक शोध है जिसके जरिये शेयर मार्किट में उपलब्ध कोई भी कंपनी की जानकारी प्राप्त किया जाता है ,जिससे निबेशको और ट्रेडर्स को फायदा हो सके।

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